Sunday , September 23 2018
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लेख विचार

नयी नीति और किसानों के सवाल

प्रो योगेंद्र यादव योगेंद्र यादव अध्यक्ष, स्वराज इंडिया बच्चा अभी हुआ नहीं, लेकिन लड्डू तीन बार खा लिये. किसानों को फसल का सही भाव देने के बारे में मोदी सरकार ने यही किया है. अभी तक एक भी किसान को ब-सजय़ा हुआ रेट मिला नहीं है. लगता नहीं है कि ...

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गांवों-शहरों का बुनियादी ढांचा

वरुण गांधी सांसद, भाजपा अहमदाबाद से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित भावनगर के किसान स्थानीय शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा अपने गांव को शहरी सीमा में शामिल किये जाने का विरोध कर रहे हैं. ऐसा ही विरोध सूरत, हिम्मतनगर और मोरबी-वांकानेर के करीबी गांवों में भी देखने में आया ...

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विधायिका एवं न्यायपालिका के बीच जूझते मौलिक अधिकार

ज्योतिका कालरा इस महीने माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भारतीय दण्ड संहिता की धारा 377 अप्राकृतिक अपराध पर दिए गए निर्णायक निर्णय से भारत विश्व का 122वां देश बन गया है जहां अप्राकृतिक संबंध अपराध नहीं है। दुनिया के दूसरी सबसे अधिक आबादी वाले देश में मौलिक अधिकारों जिसमें अपनी इच्छा ...

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एक बड़े जतिगत संघर्ष की ओर अग्रसर भारत

प्रेम शर्मा जनता परेशान है, इसलिए चुप है। जिस दिन उसे यह महसूस हो गया कि अब तो संघर्ष ही एक मात्र रास्ता बचा है, बस उसी दिन जनता के साथ छल कपट कर अपनी सुख सुविधाओं और धन,बल और प्रसिद्धि पाने वाले नेताओं की उल्टी गिनती शुरू हो जाएगी। ...

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क्या आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से की जा सकती है?

राम पुनियानी अपने हाल (अगस्त 2018) के विदेश दौरे के दौरान, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आरएसएस भारत का मिजाज बदलना चाहता है। भारत में कोई भी अन्य ऐसी संगठन नहीं है, जो देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा करना चाहता ...

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सोच व संस्कारों का परिचय कराते बेतुके बोल

तनवीर जाफरी भारतीय राजनीति में मधुर व सार्थक वचन बोलना,सौ यता व सुशीलता का प्रदर्शन,पक्ष-प्रतिपक्ष के मध्य सद्भाव व मधुर संबंध तथा देश के विकास को लेकर परस्पर सहमति जैसी बातें तो शायद बीते इतिहास की बातें बनकर रह गई हैं। तीन-चार दशक पहले की राजनीति के शिखर पर छाए ...

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नक्सली हिंसा के साथी शब्द-जेहादी

तरुण विजय वरिष्ठ नेता, भाजपा माओवादी और नक्सली कम्युनिस्ट विचारधारा को माननेवाले क्रूर आतंकवादी हैं, जो गरीब जनजातियों और संवैधानिक सत्ता के प्रतिनिधि सुरक्षा बलों पर धोखे से हमला कर एक काल्पनिक श्सर्वहारा का राज बनाने का दावा करते हैं. वे भारत की गणतांत्रिक व्यवस्था एवं सुरक्षा को सबसे बड़ा ...

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खेती और गांव की बदहाली

डॉ अश्विनी महाजन एसोसिएट प्रोफेसर, डीयू नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नबार्ड) ने अखिल भारतीय ग्रामीण समावेशी वित्तीय सर्वेक्षण, 2016-17 की रिपोर्ट में जो आंकड़े जारी किये हैं, इससे पता चलता है कि कृषि में संलग्न गृहस्थों की आमदनी में खेती और सहायक गतिविधियों जैसे पशुपालन इत्यादि से ...

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पार्टियों के चुनाव खर्च पर सीमा लगाना क्यों जरूरी है?

राजेंद्र अगले आम चुनाव की अपनी तैयारियों की बाकायदा -रु39याुरूआत के संकेत के तौर पर, चुनाव आयोग द्वारा बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में, ईवीएम म-रु39याीनों की उपयुक्तता का मुद्दा उठा तो, लेकिन उतने जोर से नहीं, जितने की उम्मीद थी। कांग्रेस और कुछ अन्य पार्टियों ने मतपत्रों से चुनाव पर ...

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कठिन है सत्य तक पहुंचना

पवन के वर्मा लेखक एवं पूर्व प्रशासक हाल ही में कोलकाता चेंबर ऑफ कॉमर्स को संबोधित करते हुए मैंने भारतीय अर्थव्यवस्था की वर्तमान स्थिति को समझने हेतु माया की दार्शनिक अवधारणा की सहायता ली. माया प्रकृति की भ्रमात्मक शक्ति है. वह एक आवरण फैला देती है, जो चीजों की सच्ची ...

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