Friday , April 19 2019
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अमेठी से चुनाव लड़ रही स्मृति ईरानी, इसलिए उनपर हो रहा आक्रमण

इंटर पास की घोषणा करने वाली स्मृति ईरानी कह रही हैं कि “वह अमेठी से चुनाव लड़ रही हैं इसलिए उनपर आक्रमण हो रहा है”। अजीब सी स्थीति है , हर कोई विक्टिम कार्ड खेल रहा है और जो विक्टिम है वह तमाशा देख रहा है। स्मृति ईरानी को बताना चाहिए कि कपिल सिब्बल के विरुद्ध चाँदनी चौक से चुनाव लड़ते समय उनकी घोषित बी काम की ग्रेजुएट डिग्री 2014 में बीए में कैसे परिवर्तित हो गयी , और यह परिवर्तित होते होते 2019 में इंटर पास में कैसे परिवर्तित हो गयी।


दरअसल ईरानी को जवाब इस पर देना चाहिए पर वह रोना धोना मचा कर मामले को डाईवर्ट करना चाहती हैं , काँग्रेस को इनके विरुद्ध चूना आयोग में शिकायत करना चाहिए , और लगातार तीन नामांकन पत्र में अलग अलग शैक्षणिक योग्यता दर्शाने के आरोप में चूना आयोग को इनका नामांकन रद्द करके देश के नेताओं को एक संदेश देना चाहिए परन्तु “मोदी है तो यह नामुमकिन है”। विक्टिम कार्ड का यही लाभ होता है कि मुख्य मुद्दा गायब हो जाता है और टेसू लोगों की भावनाओं को उभार देता है।

दरअसल राहुल गाँधी हो या काँग्रेस , वह तुरंत मुद्दों को लपक कर काउंटर करने में सुस्त है , काँग्रेस को अपनी इस कमी को दूर करना चाहिए और उसे छत्तीसगढ़ के ही अपने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सीखना चाहिए।

मोदी-अमितशाह आक्रामक राजनीति के लिए जाने जाते हैं और आक्रामक व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी उसके सामने उससे भी अधिक आक्रामक का होना होता है।

बहरहाल , पहले चरण के चुनाव के बाद इन संघी भाजपाईयों की प्रतिक्रिया बता रही है कि इनको अपनी हार का आभाष हो चुका है और अगले चरण मोदी विरोधी लहर के बीच होंगे।

सवाल यह है कि इसका कौन कितना फायदा ऊठा पाता है ? मेरी समझ यह है कि जो भूपेश बघेल बन कर इनपर आक्रामक करेगा वह लीड ले लेगा।

हाँ एक बात और कि स्मृति इरानी के बाद अभी मोदी का रोना और विक्टिम कार्ड खेलना बाकी है।

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