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यूएन में मसूद अजहर के मामले में चाइना एक बार फिर दिया झटका…

जैश-ए-मोहम्मद मुखिया मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की कोशिशों में अड़ंगा लगाने वाला चाइना सामरिक  कूटनीतिक बिसात पर खूंखार आतंकवादी गुटों का मोहरे की तरह प्रयोग कर रहा है. पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद आतंकवाद  उसे समर्थन देने वाले राष्ट्रों को अलग-थलग करने के मकसद से तैयार ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है. आतंकवाद के खात्मे के लिए जब पूरी संसार हाथ मिलाने को आगे आ रही है, चाइना बड़ी सफाई से उसी आतंकवाद का प्रयोग अपना किला मजबूत करने में कर रहा है.

उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि चाइना सिर्फ जैश ही नहीं बल्कि तहरीक-ए-तालिबान पाक (टीटीपी)  अफगानिस्तान के तालिबान की चोरी छिपे मदद लंबे समय से कर रहा है.अफगानिस्तान में हिंदुस्तान  अमेरिका के दखल को संतुलित करने के लिए कूटनीतिक चाल के तहत तालिबान की भरपूर मदद की जा रही है. सूत्रों के अनुसार, टीटीपी  जैश के पाक कश्मीर विरोधी एजेंडे को अपने नियंत्रण में रखने के लिए भी चाइना लगातार खुफिया चाल चलता रहा है. ताजा खुफिया रिपोर्ट में बोला गया है कि चाइना सामरिक  कूटनीतिक स्तर पर आतंकवाद का प्रयोग कर एक तीर से कई शिकार करने की रणनीति पर कार्य कर रहा है.

सीपीईसी की सुरक्षा को जैश दे रहा मदद

सूत्रों ने बताया कि चाइना अपने उत्तर-पश्चिम के शिगजियांग प्रांत में मुसलिम उग्रवाद को काबू में रखने के लिए जैश  टीटीपी की हर स्तर पर मदद ले रहा है. इसके अतिरिक्तचाइना पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की सुरक्षा के लिए भी जैश की सहायता ले रहा है. सीपीईसी चाइना के अशांत शिगजियांग से प्रारम्भ होकर अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा  पीओके से गुजरता है जहां इन आतंकवादी संगठनों का दबदबा है. उनके मुताबिक, यह कॉरिडोर चाइना के कारोबारी आजादी के लिए बहुत ज्यादा अहम है. इसके बनने सुचारु  संचालन से ऑयल के अयात के लिए समुद्री रास्ते से चाइना को निजात मिल जाएगी. साथ ही पाक में ऊर्जा के एरिया में चाइना के अरबों के निवेश के चलते भी वह जैश जैसे गुटों पर कार्रवाई से आंख मूंद रहा है.

भारत को पहले से थी बीजिंग से झटके की आशंका

पुलवामा आतंकवादी हमले  बालाकोट कार्रवाई के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की चाइना यात्रा के दौरान आतंकवाद के स्टेट पॉलिसी के तहत प्रयोग पर नए सिरे से वार्ता हुई थी लेकिन ऐसे राष्ट्रों को बेनकाब करने के लिए चाइना ने अपनी तरफ से कोई आश्वासन नहीं दिया था. सूत्रों ने बताया कि हिंदुस्तान को पहले से संभावना थी कि यूएन में मसूद अजहर के मामले में चाइना एक बार फिर झटका देगा. चाइना भले ही इस मामले में अपने वीटो का कारण तकनीकी बता रहा हो लेकिन इसके पीछे बड़ी सोची समझी सामरिक चाल है.

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