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भ्रमण प्राणायाम के 5 जबरदस्त फायदे

हकलाहट और तुतलाहट ऐसी चीजें हैं जो व्यक्ति क अमूनन जन्म के साथ ही मिलती है। जो लोग हकलाते हैं उन्हें एक समय पर समाज में या अपने दोस्तों से बात करने में शर्म भी आती है और कई कमेंट्स का सामना भी करना पड़ता है। अक्सर देखा जाता है कि दवाओं के सेवन के बावजूद लोगों की यह समस्या सही नहीं होती है। लेकिन भ्रमण प्राणायाम एक ऐसा तरीका है जिसके अभ्यास से हकलाहट और तुतलाहट की समस्या को सही किया जा सकता है।

यह प्राणायाम का सबसे सरल रूप है। इसमें व्यक्ति अपनी सांस को विशेष प्रकार से अन्दर की ओर लेता है और फिर उसे बाहर की तरफ छोड़ता है। अपना स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए ये प्राणायाम से बेहतर कुछ नहीं है। प्राणायाम करने के कई सारे फायदे होते है। भ्रामरी प्राणायाम से जहां मन शांत होता है वहीं इसके नियमित अभ्यास से और भी बहुत से लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। आज हम आपको भ्रमण प्राणायाम करने का तरीका और इसके लाभ व सावधानियां बता रहे हैं।

भ्रमण प्राणायाम कैसे करें
भ्रमण प्राणायाम करते हुए शरीर को सीधा रखें और सांस धीरे-धीरे लें। सांस लेते हुए मन में 1 से 4 तक की गिनती करें और पूर्ण रूप से सांस लेने के बाद ही सांस छोड़ें। मन में संख्या की गिनती करें। इस प्राणायाम में सांस लेने से अधिक समय सांस छोड़ने में लगाना चाहिए। इस क्रिया में पहले चलते हुए सांस को 4 से 5 कदम तक रोक कर रखें और फिर छोड़ें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस रोकने की क्षमता को बढ़ाते हुए 10 से 15 बार तक करें। शुरूआत में इस क्रिया का अभ्‍यास आघे घंटे तक कीजिए। यानी टहलने की शुरुआत में 2 मिनट, बीच में 2 मिनट और अंत में 2 मिनट तक अभ्यास करें। इसके बाद समय को बढ़ाते हुए 4-4 मिनट पर 3 बार करें।

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