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अमेरिका के साथ चीन का व्यापार संघर्ष चीन की अर्थव्यस्था को आई तेजी

पाकिस्तान से पहले अब चीन कंगाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। चीन ने ओबीओआर और सीपेक में जितना पैसा लगा दिया है उतना वापस नहीं आ रहा है। इसके अलावा अमेरिका के साथ चीन का व्यापार संघर्ष चीन की अर्थव्यस्था को बहुत तेजी से खोखला कर रहा है। चीन जैसे देश की अर्थव्यवस्था के टूटने का नतीजा दुनिया के कई देशों परएक साथ पड़ सकता है। ये सारी आशंकाएं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख क्रिसटीन लेगार्द ने उठाई हैं।

रविवार को दुबई में दुनिया भर की सरकारों को सावधान करते हुए लेगार्द ने कहा रकि आर्थिक वृद्धि उम्मीद से कम रहने पर उठने वाले मंदी के बंवडर का सामना करने के लिए सभी देशों को तैयार रहने होगा। ध्यान रहे आईएमएफ ने पिछले महीने ही इस साल की वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 3.7 प्रतिशत से घटाकर 3.5 प्रतिशत कर दिया था। लेगार्द ने उन कारकों को वैश्विक अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने की वजह बताया जिन्हें वह अर्थव्यवस्था के ऊपर मंडराने वाले ‘चार बादल’ बताती रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि तूफान कभी भी उठ सकता है।

लेगार्द ने कहा कि इन जोखिमों में व्यापारिक तनाव और शुल्क बढ़ना, राजकोषीय स्थिति में सख्ती, ब्रेक्जिट को लेकर अनिश्चितता और चीन की अर्थव्यवस्था के सुस्त पड़ने की रफ्तार तेज होना शामिल है। उन्होंने कहा कि विश्व की दो शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच जारी शुल्क युद्ध का वैश्विक असर दिखने लगा है।लेगार्द ने सरकारों को संरक्षणवाद से बचने की सलाह देते हुए कहा, ‘हमें इस बारे में कोई अंदाजा नहीं है कि यह किस तरह समाप्त होने वाला है और क्या यह व्यापार, भरोसा और बाजार पर असर दिखाने की शुरुआत कर चुका है।’ लेगार्द ने कर्ज की बढ़ती लागत को भी जोखिम बताया। उन्होंने कहा, ‘जब इतने सारे बादल छाये हों तो अंधड़ शुरू होने के लिए बिजली की एक चमक काफी है।’

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