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गैरकानूनी खदान मामले पर न्यायालय ने केंद्र व राज्य गवर्नमेंट को दिए ये आदेश

पिछले वर्ष 13 दिसंबर को मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स की गैरकानूनी खदान में 15 खनिक फंस गए थे. इस मामले पर आज सुप्रीम न्यायालय में सुनवाई हुई. न्यायालय ने केंद्र राज्य गवर्नमेंट से बोला कि वह विशेषज्ञों की मदद ले  खनिकों के बचाव काम की कोशिशों को जारी रखे.

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सुप्रीम न्यायालय ने गवर्नमेंट से पूछा कि जो लोग गैरकानूनी खदान चला रहे थे उनके विरूद्ध  जिन अधिकारियों ने गैरकानूनी खदान को इजाजत दी उनपर कार्रवाई हुई? जस्टिस एके सीकरी के नेतृत्व वाली बेंच ने कहा, ‘अपने बचाव काम को जारी रखें. क्या होगा अगर उनमें से कुछ या सभी अभी भी जिंदा हुए तो? चमत्कार होते रहते हैं.

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राज्य गवर्नमेंट ने उच्चतम कोर्ट को यह जानकारी देते हुए बताया कि गैरकानूनी खदान में फंसे 15 खनिकों को बचाने के अभियान में नौसेना ने पांच रिमोट संचालित उपकरण लगाए गए हैं. मेघालय गवर्नमेंट ने न्यायालय को बताया कि खान से एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला गया है लेकिन पास की नदी से हो रहे रिसाव की वजह से मजदूरों को निकालने का अभियान बाधित हो रहा है.

न्यायालय ने  न्यायालय ने मेघालय गवर्नमेंट से पूछा कि वहां गैरकानूनी खनन में शामिल लोगों के विरूद्ध आप क्या कर रहे हैं? इसपर राज्य गवर्नमेंट ने बोला कि जहां यह घटना हुई है, उस गैरकानूनी खदान को चलाने में शामिल एक आदमी को अरैस्ट किया गया है.

इससे पहले केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम न्यायालय को सूचित किया था कि मेघालय में 13 दिसंबर से एक अवैध कोयला खदान में फंसे 15 खनिकों के बचाव काम में परेशानियां आ रही हैं क्योंकि 355 फुट गहरी खदान का कोई खाका नहीं है. न्यायमूर्ति एके सीकरी  न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि यह अवैधखदान एक नदी के किनारे स्थित है  इससे हो रहा पानी का रिसाव बचाव अभियान में बाधा पैदा कर रहा है.

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