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सोशल मीडिया के कारण अवसादग्रस्त का शिकार हो रही लड़कियां

सोशल मीडिया अपनी भावनाओं को संसार तक पहुंचाने वाला आज एक बहुत बड़ा प्लेटफॉर्म हो गया है. फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्वीटर पर आए दिन लोग तरह-तरह के फोटो शेयर करते हैं  दूसरे के पोस्ट पर कॉमेंट भी करते हैं. खास बात यह है कि सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा एक्टिव किशोर ही हैं, लेकिन इन किशोर बच्चों के लिए सोशल मीडिया किसी मीठे जहर से कम नहीं है. एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया के कारण लड़कियां सबसे ज्यादा डिप्रेशन (अवसादग्रस्त) की शिकार हो रही हैं.
एक शोध के मुताबिक सोशल मीडिया ने कम आयु की लड़कियों को अपनी आगोश में ले लिया है. सोशल मीडिया के कारण किशोर लड़कियों में अनिंद्रा जैसी बीमारियां हो रही हैं. कई लड़कियां सोशल मीडिया को आत्मसम्मान के तौर पर देख रही हैं. इस शोध में 11,000 युआवों को शामिल किया गया था जो कि ब्रिटेन से थे.
इस शोध से यह बात सामने आई कि 14 वर्ष तक की लड़कियां सोशल मीडिया के पीछे पागल हैं. शोध में शामिल लड़कियों के 5 हिस्सों में से दो हिस्से की लड़कियां एक दिन में 3 घंटे से भी ज्यादा सोशल मीडिया का प्रयोग करती हैं, वहीं इस मामले में लड़के पीछे हैं.
शोध में इस बात का भी खुलासा हुआ कि 12 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया का प्रयोग तो करते हैं लेकिन इसके प्रति गंभीर नहीं हैं, वहीं 38 प्रतिशत लोग इसके पीछे पागल हैं. 38 प्रतिशत लोग रोजाना 5 घंटे से भी ज्यादा सोशल मीडिया का प्रयोग करते हैं  फिर यही लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं.
वहीं जब शोधकर्ताओं ने सोशल मीडिया  डिप्रेशन को एक साथ देखा तो पता चला कि 40 प्रतिशत लड़कियां सोशल मीडिया की वजह से ही डिप्रेशन की शिकार हैं, वहीं 25 फीसदीलड़के सोशल मीडिया के कारण डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं.
सोशल मीडिया पर आलोचना  हैरेसमेंट की वजह से इन्हें अनिंद्रा और चिड़चिड़ापन जैसी बीमारी हो रही है. लड़कियां सोशल मीडिया पर अपनी बॉडी इमेज को लेकर बहुत ज्यादापरेशान हो रही हैं. ऐसे में बच्चों के माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है कि वे अपने बच्चों को सोशल मीडिया से दूर ही रखें.
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